रोड एक्सीडेंट में जिले के बड़े ठेकेदार चेतन उपाध्याय की मौत, पोस्टमार्टम हाउस पर रोते रहे लोग

October 26, 2017 5:19 pm0 commentsViews: 2283
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अजीत सिंह

सिद्धार्थनगर कार्यालय। राजनीति और ठेकेदारी में खूबसूरती से संतुलन बना कर सभी वर्ग में लोकप्रिय युवा चेतन उपाध्याय नहीं रहे। बीती रात एक वाहन दुर्घटना में उनकी मौत  हो गई।  40 वर्षीय चेतन इटवा तहसील के ग्राम पटखौली नानकार के निवासी थे। इस घटना ने ठेकेदारी जगत और सपा समर्थकों को हिला दिया है। समाचार लिखले तक सिद्धार्थनगर पोस्टमार्टम हाउस पर उनके चाहने वालों की भीड़ लगी हुई हैं। अनेक लोग वहां हिचकियां ले रहे हैं।

बताते हैं कि चेतन उपाध्याय के साथ हादसा इटवा–डुमरियागंज मार्ग पर बीती रात लगभग 11 बजे हुआ। परिजन बताते हैं चेतन अचानक किसी काम से अपनी स्कार्पियो से शाम  को अपने घर पटखौली नानकार से इटवा  के लिए निकले। परिजनों के मुताबिक  वह किसी शुभेच्छू के संकट में होने की बात कह कर घर से निकले थे। उन्होंने परिजनों से जल्दी घर लौट आने कहा थ। मगर कुदरत कोशायद उनका घर लाटना मंजूर न था।

बताया जाता है कि चेतन उपाध्याय रात 11 बजे घर वापसी के दौरान अपनी स्कार्पियो खुद चला रहे थे। उनके दिमाग  में उस वक्त कोई उथल पुथल चल रही थी। पिपरा चौराहे के मोड पर अचानक उन्होंने टर्न लिया और गाड़ी एक पेड़ से जा टकराई। जबरदस्त धमाका हुआ, ऐसा लगा जैसे सब कुछ समाप्त होने वाला हो और हुआ भी यही।

इस घटना में उनकी गाड़ी  स्कार्पियों को अधिक क्षति नहीं हुई, लेकिन चेतन मरणासन्न हो गये  घटना की खबर पाकर आस पास के लोगों ने यूपी 100 डायल किया। यूपी 100 के जवान उन्हे लादकर सीएचसी इटवा लाये, जहां चिकित्सको ने गम्भीर हालत देखते हुए बस्ती के लिए रेफर कर दिया। बस्ती ले जाते समय चेतन ने मनौरी चैराहे के पास पहुंचते ही दम तोड़ दिया। इस खबर के बाद इटवा कस्बे में मातम का माहौल मच गया। हर आदमी उनके घर की ओर भागता दिखा।

यह घटना जनपद में जंगल की आग की तरह फैल गयी। और ठेकेदारो में शोक की लहर दौड़ गयी। शव को पुलिस ने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पोस्टमार्टम हाउस पर जनपद के संभ्रान्त लोगो एवं ठेकेदारो की भारी भीड़ रही। और सभी की नम आंखे थी, क्योंकि उनका व्यक्तित्व मृदुभाषी तथा बेहद मिलनसार था।  चेतन उपाध्याय का सपा से अच्छा सम्बन्ध था और उससे जुड़े थे। उन्हें इटवा क्षे़ से भविष्य का सपा के टिकट का दावेदार माना जा रहा था। ससमाचार लिखे जाने तक पोस्टमार्टम हाउस पर लोगों का तांता लगा हुआ था।

 

 

 

 

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